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bua ki chudai


हैलो दोस्तो मेरा नाम राकेश है , मै एक छोटे से गांव मेँ रहता हूं अभी मै फीलहाल बारहवी में पढ़ता हू | गर्मीयों की छुट्टी चल रही थी और मैं घर पर दीन रात रहकर बोर होने लगा था !! एक दीन मेरी बुआ सीमा का फोन आया और वो मां से फोन पर बाते कर रही थी !! मां ने बुआ से बात की उसके बाद वो मेरे पास आकर बोली की तेरी बुआ ने तुझे मुबंई बुलाया है || मै ये सुनकर खुश हो गया क्यूकीं मुझे मुबंई घुमने की इच्छा थी तो मै खुशी - खुशी तैयार हो गया , बुआ ने ही मेरी आनलाईन टीकट कर दी ।

खैर वो दीन भी आ गया.....जब मेरे पापा मुझे ट्रेन बीठाने के लीये स्टेशन पर आ गये !मेरी टीकट ए॰सी कंपार्टमेट मे थी , जैसे ही ट्रेन आयी मैने पापा को बाय कीया और फीर ट्रेन में बैठ गया !! ट्रेन के उस कपांर्टमेट में दो लोगो की सीट थी मैने देखा सामने वाली सीट खाली थी | मैने दरवाजा बंद कीया और अपने सीट पर आकर लेट गया .......ट्रेन चल पड़ी , सफर काफी लबां था क्यूकीं मैं मुबंई कल दोपहर तक पहुचने वाला था !! मैने सोचा की ये बुआ भी खाली फोकट ए॰सी का टीकट करा दी , अब मैं अकेला इस कंपार्टमेट में बोर हो जाउगां !!

ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ ली , मैं यू ही अपने सीट पर लेटा था और लेटे -लेटे मेरी आंख लग गयी और मै सो गया क्यूकी मुबंई घुमने की खुशी में मैं कल रात सोया नही था !! जब मेरी आंख खुली तो रात के 10 बज रहे थे ॥ मैने खाना वीना खाया और कीसी तरह रात काटी और अगले दीन मुबंई पहुच गया !!


स्टेशन पर बुआ लड़का राजू पहले से ही वंहा पहुचा था .....राजू से मै पूरे 5 साल बाद मीला था ! एकदम दुबला पतला लड़का था मानो खाना ही ना खाता हो राजू 17 साल का था और मै 19 साल का था ,,


राजू - तुम हु राकेश भैया हो??

मै - हां मै ही हूं , तुम राजू हो ??

राजू - हां मै राजू हूं !

फीर उसने मेरे पैर छुए......ये देखकर तो मैं खुश हो गया की बुआ ने काफी अच्छे संसकार दीये है , खैर मैं राजू के साथ चल दीया ॥ राजू मुझे फीर से कीसी स्टेशन पर ले गया!


मै - अरे राजू , ज्यादा दूर है क्या ? तू मुझे फीर से स्टेशन पर लाया!

राजू - अरे भैया ये लोकल ट्रेन है , 10 मीनट मे घर पहुच जायेगें!!



उसके बाद मैं ट्रेन मे फीर से बैठ गया , ट्रेन में बैठे - बैठे ही बाहर का नज़ारा देखकर मैँ मस्त हो गया उचीं - उचीं बील्डीगें बनी थी !!


हम जल्द ही घर पहुचनें वाले थे , राजू ने बताया की हम चॉल में रहते है !! हम जैसे ही घर पहुचें सीमा बुआ दरवाजे पर ही खड़ी थी !! बुआ मुझे देखकर खुश हो जाती है......मैने बुआ के पैर छुए !! एक बार के लीये तो मैं बुआ को देखता ही रह गया


क्यूकी बुआ काफी खुबसुरत थी , वो एकदम दुध की तरह गोरी थी.....बडे-बड़ी चुचीयां जो ब्लाउज फाड़ कर बाहर आना चाहती थी , और कीसी मटके की तरह उनकी बड़ी - बड़ी चौड़ी गाडं जो साड़ी के अँदर भी कमाल लग रही थी !! बुआ की उम्र 38 के करीब थी.....


बुआ - अरे राकेश चल अंदर चल बेटा !!


फीर मै बुआ के साथ कमरे में घुसा......अंदर दो कमरे थे , बुआ ने बताया की झोपड़पट्टी में छोटे - छोटे कमरे ही होते है !! मै बुआ के साथ अंदर वाले कमरे में चला गया उस कमरे में एक छोटा सा पलंग रखा था , बगल में खाना बनाने का कीचन था और नहाने के लीये एक मोरी बनी थी !! मैं पलगं पर बैठ गया बुआ ने पानी लाकर दीया मैने पानी पीया......!


बुआ - तू थक गया होगा......नहा कर आराम कर ले! मै तब तक आती हूं...!राजू वो राजू कहां मर गया इधर आ !


तभी राजू दौड़ते हुए आया.........


बुआ - कहां गया था......तू ??

राजू - वो.....वो मां मैँ.....थोड़ा बाहर घुमने.!

बुआ - घुमने......तू फीर बीना पूछे बाहर गया.....!


राजू - सॉरी मां , अब से पूछ के जाउगां !


बुआ - ऐसे नही......तूझे पता है की तू माफी कैसे मागतां है!!



बुआ की बात सुनकर , मै भी हैरान रह गया की आखीर बुआ कैसे माफी मांगने की बात कर रही है....मैने राजू की तरफ देखा वो स
र झुकाये खड़ा था.....!


बुआ - सुना नही मैने क्या कहा??

राजू - मां भैया ......

बुआ - तो क्या हुआ चल जल्दी...


मै तो और हैरान रह गया की आखीर बुआ क्या करने वाली है , तभी राजू पास में रखे एक डंडे को उठा कर बुआ के हाथ में थमा देता है! मै तो दंग रह गया और आखें तो तब फटी की फटी रह गयी जब राजू अपना पैटं उतारकर नंगा हो गया और अपने दोनो हाथ पलगं पर टीका कर अपना गांड उपर कर लीया और बुआ ने उसके गांड पर डंडे बरसाने लगी !! मै तो हैरान रह गया की बुआ इतनी हरामी औरत है ॥ बुआ ने 10 डंडे राजू के गाडं पर मारे , हर डंडे पर राजू अपना मुह दबाये चीखता ! उसके बाद राजू जैसे ही खड़ा हुआ उसका लंड देखकर तो मै हैरान रह गया उसका लंड , लंड नही बल्की लूल्ली थी कीसी बच्चे के जैसा! फीर राजू ने अपने पैटं पहन लीये और आगे वाले रुम में चला जाता है......बुआ भी कही चली जाती है ! मै नहा धो लेता हू और फीर बुआ आती है और मुझे खाना देती है !!


खाना खाने के बाद मैं पलंग पर लेट कर आराम करने लगता हूं.....!


बुआ- अरे राकेश बेटा.....तू बहुत थक गया होगा ! राजू वो राजू.....



राजू भागता हुआ कमरे में आता है......


राजू - हा मम्मी.....


बुआ - देख मै थोड़ा शातां के घर जा रही हूं , राकेश थक गया है तू थोड़ा उसके पैर दबा दे!!

राजू - ठीक है मम्मी......


मै - अरे नही बुआ ठीक है......पैर दबाने की जरुरत नही!


बुआ ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली!!


बुआ - अरे कुछ दीनो के लीये आया है.....करवा ले अपनी सेवा!


और ये कहकर......बुआ चली जाती है....! बुआ के जाते ही राजू आगे वाले रुम मे चला जाता है !


मै कुछ देर खाट पर लेटा लेटा सो गया......शाम को मेरी नीदं खुली तो देखा फुफा जी आये थे ! मैने फुफा के पैर छुए फीर फुफा और बुआ से थोड़ी बाते की घर का हाल समाचार पूछा......! उसके बाद खाना पीना खा कर सो गये ......!


ऐसे ही दीन बीतता गया......फुफा जी ने मुझे मुबंई के सैर भी कराये ! एक दीन मैं पलंग पर बैठा था.! और फीर पलंग पर लेट गया....तभी बुआ आ गयी !


बुआ - अरे राकेश बेटा क्या हुआ??

मै - कुछ नही बुआ ऐसे ही लेटा था!!

बुआ - अच्छा......और बता मुबंई कैसी लगी तूझे??

मै - बहुत अच्छी बुआ...

बुआ - अच्छा.....मुबंई में क्या अच्छा लगा??

मै - मुझे तो मुबंई में.....मेरी प्यारी बुआ अच्छी लगी!!

मै बताना भूल गया , जब से मै मुबंई में आया हू उसके कुछ दीन बाद से मै ब्लू फील्म देखने लगा था , जीससे मै बुआ के मस्त बदन को ताड़ने लगा था ! मैने एक ब्लू फील्म कल रात को देखा , जीसमे एक मां अपने बेटे के सामने दुसरे आदमी से चुदवाती है ॥ और सच बता रहा हू ये फील्म देखकर मेरा लंड फटने लगा और मैं बुआ को राजू को सामने चोदने की इच्छा होने लगी। इसी लीये मै बुआ से अब थोड़ा गंदी बात करना चाहता था.....!



बुआ - अच्छा......मैं अच्छी लगी , क्यूं झूठ बोल रहा है??


मै - अरे सच में बुआ.....तू बहुत अच्छी है!! बहुत खुबसूरत है!


ये सुनकर बुआ थोड़ी शरमा गयी......बुआ को शरमाता देख राजू वहां से उठ कर जाने लगा तो मैने कहा-


मै - अरे राजू बैठ...! कहा जा रहा है??

राजू - मै आगे वाले रुम में जा रहा हूं.....क्या करु बैठ कर!!


राजू की बात सुनकर मेरे दीमाग में एक शातीराना खयाल आया.....और मैने कहा-


मैं- अच्छा चल आ मेरा पैर दबा दे जरा!

मेरी बात सुनकर....राजू मुझे घुरने लगा! तभी.....


बुआ - तू बहुत खराब होते जा रहा है....सुना नही राकेश ने क्या कहा??

बुआ के बोलते ही राजू , झट से पलंग पर आ गया और मेरे पैर दबाने लगा....ये देख कर मेरी हीम्मत थोड़ी और बढ़ी और मेरा लंड भी!



बुआ - हां तो क्या कह रहा था तू.....मै तूझे खुबसुरत लगती हूं!


मैं - बहुत मस्त लगती है तू बुआ??


राजू अपना सर झुकाये मेरे पैर दबा रहा था.....और उसके सामने बुआ से ऐसे बात करने मे बहुत मजा आ रहा था...मैं एकदम जोश में आ गया था !!


मै - सच में कहता हू बुआ.....अगर तू मेरी बुआ नही होती तो मैं तूझे पटा लेता !


मेरी बात सुनकर , बुआ मुस्कुरायी......और बोली-


बुआ - अच्छा तो क्या करता पटा कर??


मैं - तूझे दीन रात प्यार करता बुआ......!

राजू को बहुत शर्म आ रही थी......और बुआ मेरी बातो पर मुस्कुराती उन्हे घंटा फर्क नही पड़ रहा था की वहा उनका बेटा बैठा है.....और मेरे अंदर तो जोश भरा जा रहा था !


बुआ - अच्छा , तो कैसे प्यार करता तू मुझे??


मैं - अब बुआ बोल के बताने में क्या मज़ा??


बुआ - ओ......हो , बड़ा आया मज़ा लेने वाला.....!


मै - सीर्फ मज़ा लेता नही देता भी हूं........

और ये कहते हुए .....मेरे हाथ अचानक से लंड को सहलाने लगे....जीसे बुआ और राजू दोनो देख लेते है!! बुआ थोड़ा शर्मा जाती है और इशारा करते हुए ये कहती है की राजू है.......!! मैने बुआ का इशारा समझते हुए अपना हाथ राजू के सर पर सहलाने लगा जैसे कीसी कुत्ते को सहलाते है, और सहलाते हुए बोला-


मै- बुआ तूझे राजू का नाम टामी रखना चाहीये था!!

मेरी बात सुनकर राजू बोला......

राजू - ये तो कीसी कुत्ते का नाम होता है......


बुआ तो पहले ही समझ जाती है की मैं जीस तरह राजू को सहला रहा था उसे कुत्ता ही बोल रहा था!!


बुआ हसते हुए.....

बुआ - अरे बेटा तू कीसी कुत्ते से कम है क्या??


बुआ की बात सुनकर....मै हसने लगा! और राजू अपना सर नीचे झुका लीया!


मैं अभी भी अपना हाथ......राजू के सर पर सहला रहा था....और बुआ को देखते हुए अपने लंड की तरफ इशारा कीया....जीससे बुआ शरमा गयी!! तभी अचानक से बारीश शुरु हो गया पत्तरे पर बारीश की बूदें पड़ने लगी , जीसकी आवाज़ सुनकर राजू फौरन बाहर की तरफ भागा.....और मैं पलंग पर से उठते हुए बुआ को अपनी बाहों में भर लीया.......बुआ के मस्त बदन को बाहो मे भरते ही मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.....उसकी बड़ी बड़ी चुचीयां मेरे सीने से सट कर आनँद की अनुभूती करा रहे थे!!


बुआ ने भी मुझे अपनी बांहो में भर लीया और पागलो की तरह चुमते हुए बोली-


बुआ - आह.......राकेश , बहुत देर लगा दी......इसी लीये तो तूझे बुलायी थी । ताकी तू अपनी बुआ की प्यास बुझा सके...!


बुआ की बाते सुनकर......मैं एकदम मस्त हो जाता हू....पूरे बदत्न में मस्ती की लहर दौड़ जाती है और जोश में बुआ की कमर पकड़ कर खीचते हुए अपने से चीपका कर बोला-


मैं- मैं तेरी प्यास बुझाउगां बुआ.....तूझे चोद-चोद कर अपनी रंडी बनाउगा!


बुआ - तो बना ले अपनी रंडी......देर क्यू कर रहा है!


मैं - मै तूझे तेरे बेटे के सामने रंडी बनाउगां कुतीया!


बुआ - हाय रे .....मेरे बेटे के सामने....मुझे शरम आयेगी,


......मैने अपना एक हाथ बुआ के साड़ी के अंदर डाल कर उसकी बुर पर लगाया तो उसकी बुर गीली हो चुकी थी.....बड़ी-बड़ी छाटों के बीच बुआ की गीली बुर में मैने अपनी एक उगंली घुसा दी.....



उगलीँ घुसाते ही......बुआ चीख पड़ी और अपनी दोनो बांहे मेरे गले में डालकर मुझसे लीपट गयी.....मैने जोर से अपनी उगली बुआ के बुर में अंदर तक घुसा दी....जीससे बुआ चीखते हुए अपने पंचो पर थोड़ा खड़ी होती हुई छटपटाने लगती है!


बुआ- आईईई.......ईई....राकेश.....फाड़ देगा क्या??


मै - हां मेरी रंडी.......सोच जब तेरी रसदार बुर में तेरा बेटा मेरा लंड चुसकर तेरे बुर में डालेगा तो तूझे कीतना मजा आयेगा......!

बुआ- आह.....सच में बहुत मजा आयेगा....!


मैने झट से अपनी उगलीं बुआ के बुर से नीकाल ली.....और पलगं पर आकर लेट गया, बुआ हाफ रही थी...उसे पसीने आ रहे थे!!


मै - कैसा लगा मेरी रंडी......


बुआ तो एकदम शर्मा जाती है........


मैं - अब तो तू अपने बेटे को कुत्ता बना....मेरा पालतू कुत्ता !


तभी राजू आ जाता है.....


बुआ - कहां गया था रे??

राजू - वो बारीश हो रही थी तो कपड़े नीकालने गया था....


बुआ - कीससे पुछ के गया था.......


राजू - सॉरी मम्मी......!


बुआ - सॉरी के बच्चे.....आज तेरी गलती की सजा ।जानता है क्या है?? की तू अपनी प्यारी मम्मी को चुदता हुआ देखेगा.......




ये सुनकर राजू चौक जाता है......











to be continued........
..










अब आगे.........



राजू को चौकतां देख , मै हसने लगा.....मेरा लंड फड़फड़ाने लगा था!!


राजू - ये तुम क्या कह रही हो मम्मी??


बुआ - वही जो तू सुन रहा है....।.बोल तू चुदते हुए देखेगा ना मुझे?


राजू कुछ बोलता नही......और अपनी नज़रे झुका लेता है!!



मै - अरे मेरी रंडी जरा अपने बेटे को अपनी मस्तानी गांड तो दीखा...


बुआ - अरे हां....चल नीचे जमीन पर बैठ जा!


बुआ के कहते ही, राजू जमीन पर बैठ अपने घुठने के बल बैठ जाता है..पहले पीछे मुड़ जा रंडी




मेरे कहते ही बुआ पीछे मुड़ जाती है.......मैनो राजू का बाल पकड़ कर अपनी तरफ खीच कर पलंग के बगल में बीठा लीया !



मै - आह.....देख तेरी रंडी मां.....पीछे से कीतना मस्त लगती है!और देखेगा.....लेकीन चल पहले आ अपने बाप के पैर के पास बैठ जा और मैरे पैर दबा,

मेरे कहने पर.....राजू नही सुनता......तो मै एक जोर का थप्पड़ राजू को जड़ देता हू....

बुआ - क्यू मार खा रहा है...अपने नये बाप से, जा बैठ अपने बाप के पैर के पास और सेवा कर!

बुआ के कहते ही राजू उठकर मेरे पैर दबाने लगता है....

मैं - आह , चल सीमा रंडी.....अपनी साड़ी उठा!

मेरे कहते ही बुआ अपनी साड़ी उठा लेती है!




मै - वाह....देख तेरी रंडी मां के गाडं पर ये कसी चड्ढी कैसी मस्त लग रही है!!

बुआ - कैसी लग रही है तेरी मां बेटा ऐसे?? 0...बोल


राजू अपनी नज़र उठा कर अपनी मां को देखता है.....और बोला-


राजू - अ......अच्छी लग रही है!!


मै - अब अपनी चड्ढ़ी सरका दे रंडी......और अपने गांड के दर्शन करा..




मेरे कहने पर बुआ ने अपनी आधी चड्ढ़ी ही सरकायी.....

मै - रंडी मादरचोद......पूरा चडढ़ी खोल....!

फीर बुआ ने अपनी पूरी चड्ढ़ी उतार दी......!

वाह.......कैसा है तेरी मा की गांड साले.....अच्छा ठीक से दीखा नही , अच्छे से दीखा साली!




बुआ - दीखा बेटे.....तेरी मां की गांड और बुर.....!


मैं - राजू बेटा तूझे पता है , वो जो बुर दीख रही है , उसमे से तू पैदा हुआ था....और आज मै उसी बुर की कुटायी करुगा लेकीन उससे पहले तेरी मां के कुछ नये - नये अवतार देख लेते है । चल साली अपने रंग दीखा .....






वाह सीमा रानी खुश कर दीया.......अब साड़ी पहन ले.....



बुआ साड़ी में इतनी मस्त लग रही थी की, मै क्या बताऊ ......राजू भी चोर नीगाह से बुआ को देखे जा रहा था!! बुआ पलंग पर आकर मेरी बाहों में लेट गयी....और अपना पैर राजू के उपर रखते हुए बोली-


बुआ - अरे मेरा राजा बेटा.....शर्मा रहा रहा हे, कैसी लगी तेरी मां की बुर....मस्त थी ना??


राजू कुछ बोला नही और अपना सर नीचे झुकाये बैठा रहा...ये देख बुआ बोली-


बुआ - देख बेटा मुझे गलत मत समझ....मै भी एक औरत हूं और मेरा भी दील करता है की मुझे मर्द का सुख मीले!!


बुआ की बात सुनकर.....राजू शरमाते हुए बोला-


राजू - मां तुम चीतां मत करो......मैं पापा से कुछ नही बताउगां!!


ये सुन कर बुआ खुश हो जाती है, और राजू को अपने गले से लगा लेती है!


बुआ - अरे मेरा राजा बेटा....कीतना अच्छा है तू......!


....बुआ राजू को अपने सीने से लगाये था की तभी.....मैने राजू के गाल पर जोर का चाट मारा.....और बोला-

मैं - भोसड़ी के ज्यादा नाटक मत कर.....ये चुचीयां तेरे लीये नही.....और ये कहकर मैने बुआ की चुचीं पकड़ कर जोर से दबा दी!!


बुआ- आ....ई.....ई.....मां..



राजू का गाल लाल हो गया था......क्यूकी मैने उसे जोर का चाटा मारा था....!


राजू - मां भैया मुझै मार क्यूं रहे है?? और ये तुम्हारी चुचीयां इतनी जोर से क्यू दबा रहे है?


बुआ - अरे मेरा राजा बेटा.....अब से ये तुम्हारे भैया नही तुम्हारे पापा है.....क्यूकी ये अब तेरी मां को चोदने वाले है तो हमे इनका सम्मान करना चाहीये....चाहे ये जीतना मारे.....ठीक है!!


....बुआ की बाते मेरे लंड में आग लगा रही थी......मै जोश मे आ गया....! तभी राजू बोला-

राजू - ठीक है मां......ये मेरे पापा है आज से.....!


बुआ - हाय रे मेरा राजा बेटा.......वैसे मेरा पती तू भी बन सकता था.....लेकीन तेरा लंड ही खड़ा नही होता......तू तो नामर्द नीकल गया....!


राजू के मन में पता नही क्या खयाल आया और बोला.......

राजू - मम्मी ये लंड कैसे खड़ा होता है......??


......ये सुनकर बुआ बोली.......!


बुआ - तुझे देखना है एक मर्द का लंड कैसा होता है??


राजू - हां मां........!


.......बुआ ने मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा-


बुआ - सुनीये जी......आपका बेटा , लंड देखना चाहता है....जरा दीखा दीजीये...!


.....बुआ ऐसे बात कर रही थी जैसे वो मेरी सच मे पत्नी हो.....बुआ की बाते ही मुझे गरम कर देती....मैने कहा-


मै - सच में बेटा तूझे लंड देखना है....?

राजू - हा पापा......!


......राजू के मुह से ये सुनकर मेरे अंदर जोश की लहर दौड़ पड़ी!!


मैने बुआ को इशारा कीया.....और बुआ मेरी पैटं खोल कर अलग कर दी...जैसे ही बुआ ने मेरी चड्ढ़ी खोली दोनो मां बेटे का मुह हैरत से खुला रह गया...मेरा 11 इंच का लबां और मोटा लंड देखकर....!


बुआ - हाय रे दईया तेरा इतना बड़ा है.....


.......बुआ के बोलते ही राजू ने जोर का चाटा बुआ के मुह पर जड़ दीया....और बोला-


राजू - साली पापा से तू करके बात करती है.....!

......राजू की ये बात मुझे बहुत अच्छी लगी.....अब तक तो सोच रहा था की राजू की हालत खराब करुगां लेकीन एक झटके में उसने मेरा दील जीत लीया......


बुआ मेरे पैरो में गीरते हुए बोली-

बुआ - गलती हो गयी माफ कर दो जी......


मैने राजू की तरफ देखा और बोला--

मै - क्या बोलते हो बेटा..? क्या करना चाहीए?


राजू - पापा गलती की सजा तो मीलनी चाहीये.....


राजू ने मेरा दील तो पहले ही जीत लीया था.......

मै - ठीक है बेटा......अब तू ही इस रंडी को सजा दे....और तू जो चाहे वो इसके साथ कर सकता है!!


ये सुनते ही राजू ने कहा ....ठीक है पापा !


बुआ - ये आप क्या कर रहे है , वो बेटा है मेरा....

राजू - चुप रंडी साली.......


बुआ - खबरदार......राजू मै तेरी मां हूं!


तभी राजू ने खीचं कर एक चाटा बुआ को जड़ दीया.....बुआ का गाल पूरा लाल हो गया था !

राजू - चल साली रंडी पापा का लंड चुस......!


......ये सुनकर बुआ मेरे लंड पर झुक गयी......और अपने मुह में मेरा लंड जैसे ही घुसाई , बुआ के मुह की गर्मी पाकर मै मजे मे सातवे आसमान पर घुमने लगा....


मै - आय......हाय.....बेटा......तेरी रंडी मां तो कमाल है.....बड़ा मस्त चुस रही है......!


बुआ - आप तो चुप ही रहीये.....एक तो घोड़े जैसा लंड मेरे मुह में घूसाये हो.....और ये भी बेशरम होकर अपनी मां को लंड चुसता हुआ देख रहा है.....

राजू - अपनी मां को घोड़े जैसा लंड चुसते देखने का मजा ही कुछ और है....



बुआ - हाय रे ....कीतना बेशरम है....!


और एक बार फीर से....बुआ मेरे लंड को मुह में डालकर चुसने लगी...मुझे बहुत मजा आ रहा था....लेकीन मुझे और ज्यादा मजा लेना था...तो इसीलीये....


मै - राजू बेटा....तू भी अपने मां के साथ अपने बाप की सेवा कर!!


राजू बीना देरी कीये.....मेरे लंड पर कुद पड़ा....और फीर दोनो मां बेटे लगकर बारी-बारी मेरे लंड की चुसाई करते....! करीब आधा घंटे तक मां बेटे मीलकर मेरे लंड को चुसा उसके बाद मैने बुआ को अपने उपर खीच लीया.....और उसके बाद बुआ के रसीले होठो को अपने मुह मे पूरा भर कर चुसने लगा....बुआ भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.....मैने बुआ को नीचे पटक कर उसके उपर चड़ गया और एक बार फीर बुआ के होठो को जमकर चुसते हुए उसकी चुचीयां दबाने लगा.....बुआ तो एकदम पागल हो गयी .....मै अब पूरे जोश में आ गया था....मैने राजू को कहा की वो बुआ को नगीं कर दें....राजू ने अपने मां के सारे कपड़े उतार कर नगां कर दीया...!


.....बुआ की मस्त चीकनी बुर देखकर मैं तो पागल हो गया....!


तभी बुआ ने अपनी बुर की फांके फैलाते हुए राजू से कहा-


बुआ - अरे हरामी......चल जल्दी अपनी मां की बुर को चुस कर तैयार कर , नही तो तेरे नये बाप का बड़ा लंड तेरी मां के बुर को इतना फाड़ेगा की तु जहां से आया था वही चला जायेगा.....!


राजू ने बीना देरी कीये अपना मुह , बुआ के बुर में लगाकर चाटने लगा.....बुआ तो तड़पने लगी......!


बुआ - आह.....आह.......साले हरामी....चुस....भड़वे पूरा खाजा......तेरी मां की बुर तैयार कर अपने नये बाप के लंड के लीये.....आह....!


बुआ की मस्ती भरी बाते ना सीर्फ मुझे......बल्की कभी ना खड़ा होने राजू के लंड में भी जान डाल दी और राजू का लंड भी तनतना कर खड़ा हो गया......राजू को जैसे ही अहसास हुआ वो झट से पलगं पर खड़ा हो गया....उसका लंड बील्कुल तन कर खड़ा था....करीब 7 इचं का था....ये देख मै बुआ दोनो हैरान रह गये!


बुआ - अरे बेटा ये तेरा लंड कैसे??

राजू का तो खुशी का ठीकाना ही ना रहा......वो झट से मेरे पैरो पर गीर पड़ा...!


राजू - ये सब मेरे पापा की बदौलत ....हुआ है,


मै भी खुश था....क्यूकीं मेरा भाई अब नामर्द नही रहा....मैने उसे अपने पैरो पर से उठाते हुए बोला-

मै - वाह मेरा बेटा.....अब तू नामर्द नही रहा....!


मैने देखा बुआ की आखें भी खुशी के आशुओं से भर उठी थी....!


मैं - देख सीमा हमारा बेटा तो पूरा मर्द है.....!

ये कहकर मैं और राजू दोनो अपने - अपने लंड को सहलाने लगे....ये देख सीमा शरमा गयी....! और आपनी टांगे खोलकर अपनी उगलीयों से बुर की फांके खोलते हुए बोली-


बुआ - आज तो इसका कचुबंर बनने वाला है.....पहले कौन आयेगा??


मैने और राजू एक दुसरे को देखकर थोड़ा मुस्कुराये.....! फीर राजू बोला-


राजू - पापा.....समय कम है.....वो वाला पापा भी आता होगा....तो ऐसा करते है....मैं इस साली के गांड में अपना लंड डालता हू....और बुर में!!


राजू की बात मुझे अच्छी लगी......लेकीन तभी बुआ बोली.....तो चलो आओ जल्दी......!


मैं और राजू.....दोनो पलंग पर आ गये...... राजू ने बुआ का बाल खीचते हुए पलंग पर उठा कर बीठा दीया....और सात इचं का अपना लंड एक झटके में बुआ के गले तक घुसा दीया.....बुआ छटपटाने लगी....और जैसे ही बुआ के मुह से राजू का लंड नीकला....मेने अपना लंड बुआ के मुह में जड़ तक घुसा दीया.....मेरे लंड से तो बुआ की सांसे अटक गयी आखें चढ़ने लगी......और जैसे ही मैने अपना लंड नीकाला बुआ उल्टी करने लगी..... लेकीन राजू ने उतना भी मौका नही दीया और एकबार फीर अपना लंड बुआ के मुह डालकर .....जोर - जोर से धक्के मारने लगा.....बुआ तो बदहवाश हो गयी....और बीस्तर पर इधर उधर अपने हाथ पावं मारने लगी....



राजू - मम्मी......अपना मुह पुरा खोल तेरे दातं लग रहे है.....:!


और जैसे ही बुआ ने अपना मुह थोड़ा खोला.....राजू ने अपना लंड नीकाला और मैने लंड डालकर जोर- जोर से अपना लंड बुआ के मुह में ठोकने लगा.....बुआ सीर्फ छटपटाती रहती और मैं और राजू बीना रुके उसका मुह 15 मीनट तक चोद
ते रहे.......थूक और उल्टीयो से बुआ पुरा नहा चुकी थी और जब हम दोनो ने बुआ को छोड़ा तो पंलग पर गीर गयी और जोर - जोर से हाफने लगी......बुआ करीब 10 मीनट तक ऐसे ही पड़ी रही उसके बाद हमे देखते हुए बोली-



बुआ- अरे जगंली साडों.....मार डालोगे क्या मुझे??

राजू - अब क्या करु मां....तेरे मुह में इतना मज़ा आ रहा था की पुछो मत!!


बुआ - अच्छा ठीक है.....चलो आ जाओ....समय कम है.....!

इतना कहने के बाद , बुआ एक करवट होकर लेट जाती है.....हमसे भी रहा नही गया तो जल्दी से लेट गये.....मै बुआ के सामने की तरफ और राजू बुआ के पीछे की तरफ....उसके बाद बुआ ने अपनी टागें थोड़ा उठा ली जीससे मै और राजू ने अपनी - अपनी टागें बुआ की दोनो टागों के बीच से डालते हुए एक दुसरे की टांगों पर चढ़ा लीया.....अब मेरा लंड बुआ की गीली हो चुकी बुर पर लटक रहा था....और राजू....की उसके गांड पर!



बुआ - अरे जानवरो.....तेल तो ले लो.....मार डालोगे ऐसे तो....!



.......राजू ने पीछे से अपना डालते हुए बुआ की चुचीयों को पकड़ कर मसलते हुए अपनी मां के गले पर एक कीस करते हुए बोला--



राजू - मम्मी......अगर आराम से चला जायेगा तो मजा नही आयेगा....!

मैं - हां बु

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